ओंकारेश्वर महादेव: श्रेष्ठ फलदायी
शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में ओंकारेश्वर महादेव का विशेष महत्व है। नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव का शिवलिंग स्वंभू प्राकृट्य है।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिला स्थित इस ज्योतिर्लिंग की खासियत यह है कि यहां का शिवलिंग नर्मदा नदी की आगोश से स्वत: प्राक्ट्यमान है। ओंकारेश्वर नगरी को हिन्दुओं के सर्वश्रेष्ठ तीर्थ के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है।
ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव की ख्याति देश विदेश में है। विशेषज्ञों की मानें तो देवी अहिल्याबाई होल्कर नित्य मृत्तिका के 18 सहस्त्र शिवलिंग तैयार कर पूजन करने के उपरांत नर्मदा नदी में विसर्जित करती थीं। इस पूजा-अर्चना से शिव प्रसन्न हुये। अहिल्याबाई होल्कर ने वरदान मांगा कि इसी स्थान पर विद्यमान हों। तभी से इस नगरी को ओंकार-मांधाता की ख्याति मिली।
ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के श्रीमुख से हुआ। वेद पाठ भी इसके उच्चारण के बिना नहीं होता। ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इस क्षेत्र में 68 तीर्थ हैं। मान्यता है कि हिन्दुओं के 33 करोड़ देवता इसी क्षेत्र में प्रवास करते हैं। शास्त्र मान्यता है कि कोई भी तीर्थ कर लें लेकिन यदि ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन नहीं किये तो सभी तीर्थ यात्रा आधी-अधूरी मानी जायेगी।
शास्त्र मान्यता यह भी है कि यमुना नदी में 15 दिन स्नान तथा गंगा नदी में सात दिन करने से जिस पुण्य-प्रताप एवं फल की प्राप्ति होती है। नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से उक्त पुण्य-प्रताप एवं फल की प्राप्ति होती है। नर्मदा नदी को कोटितीर्थ एवं चक्रतीर्थ भी कहा जाता है। यहीं स्नान कर श्रद्धालु सीढ़ी चढ़ कर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन करने जाते हैं। महादेव मंदिर तट पर ही कुछ ऊंचाई पर स्थित है।
ओंकारेश्वर महादेव का शिवलिंग अनगढ़ है। शिवलिंग शिखर की ठीक नीचे स्थित न होकर किनारे पर स्थित है। शिवलिंग के चारों ओर जल भरा रहता है। महादेव के इस मंदिर का प्रवेश द्वार छोटा है। जिससे प्रतीत होता है कि जैसे गुफा में प्रवेश कर रहे हों। निकट ही पार्वती जी के भी दर्शन होते हैं। ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन कर सीढ़ी से चढ़कर उपर जाने पर महाकालेश्वर शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यह शिवलिंग शिखर के नीचे स्थित है।
तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ महादेव का शिवलिंग स्थापित है। यह शिवलिंग भी शिखर के नीचे स्थित है। चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर महादेव का शिवलिंग स्थापित है। पांचवी मंजिल पर ध्वजेश्वर महादेव का शिवलिंग स्थापित है।
ओंकारेश्वर महादेव तीर्थ क्षेत्र में चौबीस अवतार, माता घाट, सीता वाटिका, धावड़ी कुंड, मार्कण्डेय शिला, मार्कण्डेय संयास आश्रम, अन्नपूर्णाश्रम, विज्ञानशाला, बडे़ हनुमान, खेडापति हनुमान, ओंकार मठ, माता आनन्दमयी आश्रम, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, गायत्री माता मंदिर, सिद्धगौरी सोमनाथ, माता वैष्णो देवी, विष्णु मंदिर, ब्राह्मेश्वर मंदिर आदि दर्शनीय हैं।
ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इंदौर है। इंदौर एयरपोर्ट से ओंकारेश्वर महादेव की दूरी करीब 75 किलोमीटर है। खंडवा-रतलाम रेल मार्ग से श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर महादेव के दर्शन के लिए जा सकते हैं। सड़क मार्ग से दर्शन के लिए यात्रा की जा सकती है।
22.245623,76.151030
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