Friday, 1 November 2019

मंदार पर्वत: पवित्र धार्मिक पर्यटन

   मंदार पर्वत को धार्मिक पर्यटन की शान एवं शोभा कहा जाना चाहिए। जी हां, मंदार पर्वत का पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व इसे विशिष्ट बना देता है।

   हिन्दुओं के इस अति पवित्र एवं धार्मिक स्थान की ख्याति वैश्विक स्तर पर है। भारत के बिहार प्रांत के जिला बांका स्थित मंदार पर्वत को समुद्र मंथन की मथनी माना जाता है। लिहाजा सदियों प्राचीन मंदार पर्वत को आस्था का स्थान माना जाता है। इसे मदरांचल भी कहा जाता है।

   वस्तुत: मंदार पर्वत बांका जिला के बौंसी में स्थित है। लोक मान्यता है कि भगवान विष्णु सदैव मंदार पर्वत पर निवास करते हैं। लिहाजा आस्था एवं विश्वास के इस स्थान के प्रति श्रद्धालुओं में अगाध श्रद्धा है।

  मान्यता है कि मंदार पर्वत का उपयोग देव-दानवों के बीच समुद्र मंथन की मथानी के तौर पर किया गया था। लिहाजा हिन्दुओं के लिए मंदार पर्वत भगवान विष्णु का यह पवित्र स्थल है। 

   मंदार पर्वत को जैन धर्म को मानने वाले प्रसिद्ध तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य से ताल्लुक रखने वाला स्थान मानते हैं। आदिवासियों के लिए मंदार पर्वत एक अति सिद्ध स्थान है। प्रत्येक वर्ष जनवरी में रात्रि में एक विशेष साधना पर्व मनाया जाता है। इसमें भगवान श्री राम एवं लक्ष्मण की साधना की जाती है। 

   समुद्र मंथन की पौराणिक गाथा से जुड़ा होने के कारण मंदार पर्वत का विशेष धार्मिक महत्व है। काले ग्रेनाइट पत्थर का करीब 700 फुट ऊंचा यह पर्वत अति दर्शनीय है। 

   खास यह कि मंदार पर्वत की शानदार एवं सुन्दर चट्टानों पर उत्कीर्ण सैकड़ों प्राचीन मूर्तियां, गुफाएं, मंदिर आदि इत्यादि धार्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक गौरव को व्यक्त करते हैं। मंदार पर्वत की मूर्तियां उत्तर गुप्त काल की मानी जाती हैं। 

   मंदार पर्वत के सर्वोच्च शिखर पर भगवान विष्णु का दिव्य भव्य मंदिर है। इस मंदिर में पद चिह्न अंकित हैं। मान्यता है कि यह पद चिह्न भगवान विष्णु के पद चिह्न हैं। हालांकि जैन धर्म को मानने वाले इसे तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के पद चिह्न मानते हैं। 

   मंदार पर्वत के शिलाखण्ड पर अनेक सुन्दर मूर्तियों के दर्शन होते हैं। इनमें खास तौर से भगवान शिव, माता पार्वती, सिंह वाहिनी दुर्गा, महाकाली एवं नरसिंह आदि की प्रतिमाएं हैं। विशेषज्ञों की मानें तो मंदार पर्वत वैष्णव सम्प्रदाय का मुख्य केन्द्र माना जाता है।

   प्रसिद्ध वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु ने मंदार पर्वत को अपनी जीवन यात्रा में विशेष महत्व दिया है। मंदार पर्वत की तलहटी में स्थित पापहरणी तालाब का विशेष महत्व है।

   लोक मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। 

   मंदार पर्वत की तलहटी में स्थित इस तालाब में स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु भगवान मधुसूदन की पूजा अर्चना करते हैं। श्रद्धालु दही चूड़ा एवं तिल के लड्डू विशेष प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं।

   मंदार पर्वत की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट लोकनायक जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट पटना है। निकटतम रेलवे स्टेशन बांका जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मंदार पर्वत की यात्रा कर सकते हैं।
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