हेमकुण्ड साहिब: सिखों का तीर्थ
हेमकुण्ड को सिख समुदाय का श्रेष्ठतम तीर्थ कहा जाना चाहिए। जी हां, हिमालय की गोद में स्थित हेमकुण्ड की यात्रा किसी तप से कम नहीं।
उत्तराखण्ड के चमोली में स्थित हेमकुण्ड वस्तुत: प्राकृतिक सुन्दरता के बीच एक धार्मिक स्थान है। समुद्र तल से करीब 4632 मीटर ऊंचाई पर स्थित हेमकुण्ड की अपनी एक विशिष्ट यशोगाथा है। हेमकुण्ड वस्तुत: संस्कृत शब्दार्थ है। हेम का आशय बर्फ एवं कुण्ड का आशय कटोरा से है।
बर्फीली झील किनारे स्थित हेमकुण्ड चौतरफा सात पर्वत श्रंखलाओं से घिरा है। इन सात पर्वत शिखर पर निशान साहिब की शोभा दिखती है। हेमकुण्ड की यात्रा गोविन्द घाट से पैदल चढ़ाई से करनी होती है। सुरम्य घाटियों-वादियों के मध्य यह यात्रा बेहद रोमांचक एवं सुखद होती है।
हिमालय की गोद में रचा-बसा गुरुद्वारा हेमकुण्ड साहिब सिख समुदाय का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहां गुरुद्वारा में हेमकुण्ड साहिब सुशोभित हैं। विशेषज्ञों की मानें तो हेमकुण्ड का उल्लेख गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ में है।
विशेषज्ञों की मानें तो सिख समुदाय के दसवें एवं अंतिम गुरु श्री गोविन्द सिंह ने जीवन में ध्यान साधना की थी।
स्थानीय निवासी हेमकुण्ड साहिब को असामान्य, पवित्र, विस्मय एवं श्रद्धा का स्थान मानते हैं। हेमकुण्ड की झील एवं उसके आसपास के क्षेत्र को लोकपाल कहा जाता है। लोकपाल से आशय संरक्षक होता है।
झील के किनारे मंदिर भी है। इस मंदिर का निर्माण लक्ष्मण ने कराया था। सिख गुरु गोविन्द सिंह जी ने इस मंदिर में पूजा अर्चना की थी। अब इस स्थान को गुरुद्वारा माना जाने लगा।
इस दर्शनीय तीर्थ में चारों ओर बर्फ के ऊंचे पर्वत शिखर दिखते हैं। विशाल झील का जल अति शीतल अर्थात बर्फीला होता है। फिर भी श्रद्धालु स्नान ध्यान कर गुरुद्वारा में मत्था टेकते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इस बर्फीली झील में हाथी पर्वत एवं सप्त ऋषि पर्वत श्रंखलाओं से पानी आता है। एक छोटी जलधारा इस सुन्दर झील से प्रवाहमान होती है। इसे हिमगंगा कहते हैं। झील के किनारे लक्ष्मण मंदिर भी स्थित है।
अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण हेमकुण्ड साहिब के दर्शन सर्दियों में दुलर्भ होते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सर्दियों में बर्फ जमी रहती है। जिससे यात्रा मुश्किल हो जाती है। सर्दियों के बाद मई में हेमकुण्ड के पट दर्शन के लिए खुलते हैं। हेमकुण्ड की यात्रा साहस एवं धैर्य से करनी होती है।
कारण कई बार मुश्किलें भी पेश आती हैं। हालांकि यह मुश्किलें रोमांचक एहसास के पीछे छूट जाती हैं। हेमकुण्ड की मुख्य यात्रा गोविन्दघाट से प्रारम्भ होती है। गोविन्दघाट से घांघरिया तक करीब 13 किलोमीटर दुलर्भ चढ़ाई करनी होती है।
इसके बाद करीब 6 किलोमीटर पर्वतीय खड़ी चढ़ाई करनी होती है। पर्यटक या श्रद्धालु यहां ट्रैकिंग का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
हेमकुण्ड की यात्रा बेहद रोमांचक एवं प्रफुल्लित करने वाली होती है। कारण कहीं पर्वत श्रंखला तो कहीं घाटियां-वादियां होती हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित इलाका बेहद दर्शनीय होता है।
जिससे पर्यटक थकान का एहसास नहीं करते। प्राकृतिक खूबसूरती के इस सफर में सुन्दर झरनों की श्रंखला भी देखने को मिलती है। इसी के निकट ही फूलों की घाटी भी है।
हेमकुण्ड साहिब की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट देहरादून है। गोविन्दघाट से जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून की दूरी करीब 292 किलोमीटर है।
गोविन्दघाट से हेमकुण्ड की यात्रा पैदल तय करनी होती है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश से गोविन्दघाट की दूरी करीब 273 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी हेमकुण्ड साहिब की यात्रा कर सकते हैं।
30.403601,79.330902
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